सामान्य उपनिषदे

अक्षी उपनिषद     अध्यात्मोपनिषद     आत्मबोधोपनिषद     आत्ममोपनिषद     अन्नपूर्णोपनिषद

    एकाक्षरोपनिषद     कौषितकि     गर्भोपनिषद     निरालम्बोपनिषद     पैंगलोपनिषद

    प्राणाग्नि-होत्रोपनिषद     महोपनिषद     मान्त्रिकोपनिषद     मुक्तिकोपनिषद     मुद्‍गलोपनिषद

    मैत्रायणि उपनिषद     वज्र-सूचिकोपनिषद     शारीरकोपनिषद     शुक-रहस्योपनिषद     सर्वसारोपनिषद

    सावित्रि उपनिषद     सुबालोपनिषद     सूयोपनिषद     स्कन्द (त्रिपाद्‌विभूति) उपनिषद

मुक्तिकोपनिषदांत ’१०८ उपनिषदांचा अभ्यास कर’ असा रामाने हनुमंतास उपदेश केला. विद्वानांनी या उपनिषदांमध्ये चर्चिलेल्या विषय संबंधाने, म्हणजे देवतांसंबंधी, योग संबंधी, संन्यास विषयक असे काही विभाग पाडले आहेत. त्यात जिथे विशिष्ट विषय संबंध नाही अशा उपनिषदांना ’सामान्य उपनिषदे’ म्हटले आहे. सामान्य उपनिषदे एकूण २४ आहेत -